भारत 20 हजार करोड़ से बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन हब 6 लाख बेरोजगार युवाओं को मिलेगी नई नौकरियां

भारत 20 हजार करोड़ से बनेगा ग्रीन हाइड्रोजन हब 6 लाख बेरोजगार युवाओं को मिलेगी नई नौकरियां

भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का वैश्विक हब बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को लागू करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में 19,744 करो रुपए के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई। यह मिशन रिफायनिंग, स्टील, सीमेंट, लौह-अयस्क, जहाज की आवागमन जैसे सेक्टर में प्रदूषण फैलाने वाले मौजूदा गैसों के इस्तेमाल की जगह ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग की राह सुलभ कराएगा। सरकार का यह कहना है कि ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में कुल 8 करोड़ के निवेश का रास्ता खुलेगा और 6 लाख युवाओं को नई नौकरियां मिलेगी।

कैबिनेट फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से निर्धारित वर्ष 2070 तक नेट शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने में भी देश की मदद करेगा। वर्ष 2030 के लिए कुछ बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखे गए हैं। जैसे घरेलू स्तर पर 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना  इसके लिए 8 लाख करोड रुपए के निवेश की दरकार होगी। एक बड़ा फायदा यह होगा कि भारत एक लाख करोड़ रुपए के कॉम इंदन का आयात करेगा साथ ही पर्यावरण को एक बड़ा फायदा यह होगा कि औद्योगिक क्षेत्र से 50 लाख टन कार्बन उत्सर्जन किया जाएगा।बताते चले कि अभी देश के विभिन्न उद्योगों में जिस हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है उसे ग्रे- हाइड्रोजन कहा जाता है। इसमें इलेक्ट्रोलाईसिस की भूमिका अहम होती है।लेकिन इस मिशन में रिन्यूएबल सेक्टर से हासिल की हुई बिजली का इस्तेमाल हाइड्रोजन बनाने में किया जाएगा। यह भी उल्लेखनीय है कि रिलायंस और अदाड़ी जैसे दिग्गज उद्योग समूहों ने ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर अपनी महत्वकांक्षी योजनाओं का ऐलान पहले ही कर दिया है।

ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को दी स्वीकृत

8 लाख करोड़ रुपए के निवेश का खुलेगा रास्ता 2030 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

* प्रदूषण फैलाने वाली गैसों के इस्तेमाल की जगह ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग की सुलभ होगी राह

* 6 लाख लोगों को देश में मिलेगा रोजगार,नेट जीरो का लक्ष्य हासिल करने में मिलेगी मदद

ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात को भी दिया जाएगा बढ़ावा

अनुराग ठाकुर ने बताया कि यह मिशन भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की घरेलू मांग पैदा करने, उसका उत्पादन करने और उसके निर्यात को बढ़ावा देगा इसके लिए घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रोलिसिस के निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण को अलग-अलग प्रोत्साहन दिया जाएगा। मिशन के तहत 17490 करोड रुपए का आवंटन साइट प्रोग्राम के जरिए किया जाएगा, जबकि 1466 करो रुपए का इस्तेमाल प्रायोगिक परियोजनाओं के लिए,400 करोड़ रुपये शोध व विकास के लिए और 388 करोड़ रुपये दूसरे कार्यो के लिए आधारित किए गए हैं।

 

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